याद-ए-सकीना में अजादारों ने की कैदखाना-ए-शाम की जियारत

  • इमाम हुसैन को जनाबे सकीना का पुरसा नम आंखों से दिया
लखनऊ। अंजुमन गुलजारे पंजतन की ओर से हर वर्ष की तरह इस बार भी याद-ए- जनाबे सकीना का आयोजन पूरी अकीदत के साथ किया गया। हुसैनाबाद के एतिहासिक छोटे इमामबाड़े में आयोजित याद-ए-सकीना में बड़ी सं या में अकीदतमंदों को कैद खाना-ए-शाम के दिलसोज मंजर की जियारत करायी गयी। साथ ही इमाम सय्यदे सज्जाद के ताबूत, हजरत अब्बास के अलम और हजरत अली असगर के झूले के अलावा दुलदुल की भी जियारत करायी गयी।
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मोहर्रम के अंतिम रविवार को हर साल होने वाले कार्यक्रम
याद-ए-सकीना में लगातार अकीदतमंदों की सं या में इजाफा होता आ रहा है। याद-ए-सकीना का आयोजन इस बार मुजाहरे $गम शीर्षक से हुआ। इस बार भी अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन की बेटी जनाबे सकीना की याद में भारी सं या में यहां शिरकत की। तिलावते कलाम के बाद शुरु हुए कार्यकम में सबसे पहले शायरों ने बारगाह-ए-हजरत इमाम हुसैन में नजराना-ए-अकीदत पेश की। इसके बाद अजमेर से आये मौलाना गुलजार हुसैन जाफरी साहब ने मजलिस को खिताब किया। उन्होंने बारगाह-ए-हजरत इमाम हुसैन में नजराना-ए-अकीदत पेश की और अंत में कर्बला से लेकर शाम तक के सफर में जनाबे सकीना पर हुए जुल्मों को बयान किया। जिसको सुनते ही अजादारों की आंखों में आंसू आ गये। मौलाना की मजलिस के बाद जीशान आजमी ने जनाबे सकीना पर किये गये जुल्मों सितम को अपनी तकरीर में बयान किया और इमाम हुसैन को उनकी चार साल की चहेती बेटी जनाबे सकीना का पुरसा दिया।
मजलिस और तकरीर के बाद अजादारों को कैद खाना-ए-शाम की जियारत करायी गयी। कैद खाने की जियारत होते ही हर अजादार की आंखे नम हो गयी। कैद खाने के अलावा यहां अजादारों को इमाम सय्यदे सज्जाद के ताबूत, हजरत अब्बास के अलम और हजरत अली असगर के झूले के अलावा जुलजनाह की भी जियारत करायी गयी। साथ ही शहर की अंजमनों में अंजमन-ए-शब्बीरिया, नय्यरुल इस्लाम, गुलामाने हुसैन समेत कई अंजुमनों ने नौहा वानी व सीनाजनी की। वहीं इस दौरान बच्चों व युवाओं ने जंजीर का मातम करके इमाम हुसैन को उनकी बेटी जनाबे सकीना का पुरसा दिया। इसके बाद कनाडा से आये मौलाना सैय्यद जकी बाकरी ने अलविदाई मजलिस को खिताब किया। इसके बाद आयोजक अंजुमन गुलजारे पंजतन ने नौहा वानी व सीनाजनी की। जिसमें साहबे बयाज दिलावर हसन ने मशहूर नौहा कैद खाने में कहती थी, सकीना भाई, जुल्म आंदा ने किया हम पर ये कैसा भाई और अन्य नौहों को पढ़कर कार्यक्रम का समापन किया।

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